उम्मीद का टूटना ,
इंतिहा गम का
कोशिश , होंसला और तुम
कितना मुश्किल है
अपने आप से लड़ना
दम तोड़ती उमंग
और
जिंदगी की पेचीदगी
एक गुत्थी सुलझती नहीं ,
फिर से बिखराव
ए काश .............
फिर से रंगों के साथ की तम्मन्ना,
दुःख न होता घरूंदे टूटना का
हवा के बहाव में बह जाते सारी पेचीदगियां
मगर
कुदरत को यह मंज़ूर नहीं ,
और
मुझे कुदरत से गिला नहीं....
ए काश....
कियों
डूबते - उगते सूरज का दामन लाल होता है
समझता हूँ आज इस हकीकत को
आँसू के बहने से आँखे
लाल ही होती हैं
मगर
उसको यह कौन समझाए
यह तो कुदरत है
फिर भी दिल से यह आरजू निकलती है
ए काश........
सच का वास्ता दिल की आरजूवो से था
और
मतलबी बन न सका ,
मगर इस दिल को कौन समझाए ,
धरकन अभी बाकि है ,
मगर
खून में वो रवानी नहीं ,
जिंदगी को अगर यही मंज़ूर है
फिर
ज़िन्दगी कियों है
मौत और ज़िन्दगी के बीच
यह जो उलझन है
कारवां की तलाश है और भीढ़ मेरे साथ है
ए काश .......

3 comments:

जिंदगी को अगर बिना थके जीना है तो चलो मत, बहो

navneet se me bilqul sehmat hun..

बहने के लिए रवानी की दरकार होती है मगर चलने के लिए ताक़त की,और मैं ताक़तवर हूँ

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