तेरी जुल्फूं के उलझन को सुलझाऊं कैसे
तेरी ओर निगाहें और दिल में शैतानी ,
कुछ इस तरह दिल पे तेरी हुस्न की मदहोशी ,
अजब सा एहसास था
या था दो वजूद का मिलन
कुछ इस तरह करीब थी तुम मेरी
हवास था बेखुद और दिल था मुतमईन
चाहत और होश व हवास पे तुम्हारी मल्कियत
न कोई गिला न कोई गम
मौसम का कुसूर या कुदरत का फरमान
हद तो तय था, दोनों थे उस पे कायम ,
मुश्किल था या यों कहें नमुमकीन
एक तरफ जुबां और एक तरफ जज़्बात
जुबान जज़्बात से जीत गया
और
हम हार के भी जीत गए......
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1 comments:
sir, aap to bade romentic kism ki kavitayen likh rahe ho.. kya ho gayaa?
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